Monday, 3 September 2012

मनमोहन तो महमूद गजनवी का भी बाप निकला.

ये मनमोहन तो महमूद गजनवी का भी बाप निकला.
गजनवी तो केवल दौलत लूटता था ये तो देश के जल जंगल और जमीन तक को नहीं बख्श रहा.
आज ही एक अंग्रेजी अखबार में छपी विशेष रिपोर्ट के अनुसार 2004 से अबतक देश के समुद्री तटों से 48 लाख करोड़ का थोरियम गायब हो चुका है.
धरती आकाश और पाताल की सम्पदा बेचने के बाद अब समुद्री सम्पदा को भी बेच डाला एक और जघन्य लूट ! कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार कहाँ तक और कितना लूटेगी देश को ?
थोरियम की लूट से सम्बन्धित समाचार की पुष्टि के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करिए.
http://www.thestatesman.net/index.php?option=com_content&view=article&id=422057%3Aspecial-article&catid=38%3Aeditorial&from_page=search
इस थोरियम लूट की कथा हिंदी में पढनेके लिए ये लिंक क्लिक करिए.
http://mediadarbar.com/11496/48-lakh-crore-nuclear-fule-robbery/

Tuesday, 28 August 2012

ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के...!!!

ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के
अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के

कह रही है झोपडी औ' पूछते हैं खेत भी
कब तलक लुटते रहेंगे लोग मेरे गाँव के

बिन लड़े कुछ भी नहीं मिलता यहाँ ये जानकर
अब लड़ाई लड़ रहे हैं लोग मेरे गाँव के

हमारी आवाज़ का गला घोंटने के सरकारी दमनचक्र के खिलाफ
आज से इस प्राचीर पर वो मशाल दमकेगी जो प्रतीक है अंधकार के विरूध संघर्ष का. और अब ये तब तक दमकेगी, जब तक देश में भूख-गरीबी-भ्रष्टाचार-आतंक-देशघाती तुष्टिकरण से व्याप्त
हताशा निराशा और शोक के "स्याह" सन्नाटे के सौदागरों का 2014 के चुनावी श्मशान में राजनीतिक अंतिम संस्कार सम्पन्न नहीं हो जायेगा.

Monday, 27 August 2012

बिना पद-अधिकार के लाखों करोड़ डकारने वाले NGO कुर्सी पाकर क्या करेंगे


अन्ना गैंग के आठवां फेल ट्रक ड्राइवर सरगना किशन बाबूराव ने भी आज कहा कि, चुनावों में भाजपा और कांग्रेस को हराओ. हम देश को एक नया राजनीतिक विकल्प देंगे.
उसका गुर्गा केजरीवाल और उसके चमचे तो पहले से ही ये कह रहे है.
एक बात का विशेष ध्यान रखिये कि ये पूरा गैंग, छोटे से कार्यकर्ता से लेकर किशन बाबूराव और केजरीवाल तक केवल और केवल NGO के गोरखधंधे से ही माल कमाते हैं. विदेशों से इनको मिलने वाली तथाकथित चंदे की मोटी रकमों के किस्से जमकर जगजाहिर हो चुके हैं. जनलोकपाल बिल के दायरे में NGO's शामिल नहीं हो इसके लिए इन्होने कैसा नंगनाच किया था ये भी पूरे देश ने देखा था.
अतः ये कैसा राजनीतिक विकल्प देंगें ज़रा इसकी एक झलक देख लीजिये.
NGO's को विदेशों से मिलने वाली चंदे की रकम का हिसाब-किताब रखने वाले गृहमंत्रालय के FCRA विंग के अनुसार मार्च 2010 को समाप्त वित्तीय वर्ष तक NGO's को 94 हज़ार करोड़ रुपये का विदेशी चंदा मिला. (देखें ये लिंक http://www.rediff.com/business/slide-show/slide-show-1-column-ndian-ngos-received-rs-94k-cr-in-17-yrs/20120229.htm )
इसमें भी 2007-08, 2008-09, 2009-10 के बीच इन्हें लगभग 31 हज़ार करोड़ का विदेशी चंदा मिला (देखें ये लिंक http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-03-15/india/31196382_1_foreign-funds-foreign-contribution-ngos) अर्थात औसतन 10 हज़ार करोड़ प्रतिवर्ष का केवल विदेशी चंदा. यदि इसी औसत से मार्च 2012 तक के 2 और साल जोड़ लीजिये तो अबतक लगभग एक लाख पन्द्रह हज़ार करोड़ का सिर्फ विदेशी चंदा NGO's को मिला है. केंद्र और देश की राज्य सरकारों से मिलने वाले ऐसे अनुदानों की रकम इससे कई गुना ज्यादा है. तब ऐसे चंदे की रकम संभवतः दसियों लाख करोड़ हो जायेगी.

क्या ये गैंग इस देश को कोई हिसाब दे सकता है कि, इस लाखों करोड़ चंदे की रकम से देश की जनता के हित के लिए कौन सा काम.? कब.? और कहाँ.? हुआ...
इसके बजाय जब NGO's की जांच लोकपाल के दायरे में रखने की बात हुई थी तो इस गैंग ने उसके विरोध में जमकर नंगनाच किया था.
अतः इस देश में जिस NGO गिरोह ने बिना किसी सरकारी पद और अधिकार के जनता की भलाई के नाम पर लाखों करोड़ की रकम डकार ली हो उस उस NGO गिरोह के ही लोगों को जब सत्ता और अधिकार मिल जायेंगे तब क्या हाल होगा.?
-> कृपया इस सवाल को अधिक से अधिक लोगों से शेयर करिए.

Sunday, 26 August 2012

"बाप, पूत, नाती, यही तीन बराती " ...!!!

दिल्ली में रविवार 26 अगस्त को गज़ब मिलीभगत की धूर्त सियासी नौटंकी हुई.
anna गैंग के 3-4 जगहों पर हुए प्रदर्शनों में कुल मिलाकर 100-150 लोग ही इकट्ठा हुए,(हालंकि चुनिन्दा चैनलों के खबरिया कौव्वों ने बहुत बढ़ाने-चढाने की कोशिश की लेकिन टीवी के परदे की फोटो प्रदर्शनकारियों की शर्मनाक संख्या के सच की चुगली चीख चीख कर करती दिखीं. लेकिन कमाल देखिये कि, इन प्रदर्शनकारी कांग्रेसी दलालों का माहौल बनाने के लिए दिल्ली पुलिस ने आंसूं गैस के गोले दागने, वाटर कैनन चलने और लाठीचार्ज करने के पूर्व नियोजित ड्रामे को बहुत मेहनत से अंजाम दिया. और चुनिन्दा चैनलों के खबरिया कौव्वों ने दिल्ली पुलिस के इस ड्रामे के प्रचार में ऐसी हाहाकारी कांव-कांव शुरू की कि, मानों दिल्ली में प्रलय आ गयी हो.
जबकि सच ये है कि, इस केजरीवाल और उसके गुर्गों को प्रदर्शन के लिए आदमी ढूंढें नहीं मिले. परिणामस्वरूप इसे और इसके कुल 6 गुर्गों को पुलिस ने शुरू में ही प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार करने के घंटे भर बाद पुनः छोड़ दिया ताकि ये ड्रामे को कुछ देर और जारी रख सके. इसने वही किया भी.
इसकी बेशर्मी देखिये कि, इतनी शर्मनाक स्थिति वाले अपने फूहड़ प्रदर्शन बावजूद ये पूरी निर्लज्जता के साथ खबरिया कौव्वों के कैमरों और माइकों पर दावा कर रहा था कि, ये आन्दोलन नहीं क्रांति है. और उन खबरिया कौव्वों की बेहयाई देखिये कि, वो इस केजरीवाल के हास्यास्पद और सरासर झूठे बयान को ब्रेकिंग न्यूज बना के दिखाने-सुनाने में जुटे थे, जबकि सच ये है कि, इसकी इस "प्रदर्शन बरात" में आम आदमी तो था ही नहीं, इसके और इसके दर्जन भर गुर्गों के NGO के कुल 100-150 नौकर चाकर इस "प्रदर्शन बरात" में सरकारी दामाद की तरह शामिल थे, और उस पुरानी कहावत को चरितार्थ कर रहे थे कि "बाप, पूत, नाती, यही तीन बराती " ...!!!

Saturday, 25 August 2012

इन बाप-बेटों का घर क्यों नहीं घेरते केजरीवाल..?

पिछले डेढ़ सालों से किसी उजड्ड गंवार चरवाहे की तरह हाथ में जनलोकपाली लट्ठ ले के केजरीवाल ने ईमानदारी को अपने घर की भैंस की तरह मनमाने तरीके से हांकने की ही जिद्द की है.
रविवार को जिस कोयला घोटाले की आड़ में गडकरी का घर घेरने की धमकी केजरीवाल ने दी है, वह धमकी केजरीवाल की तथाकथित ईमानदारी के दोगले-दोहरे चरित्र-चेहरे का शर्मनाक उदाहरण है.
सीएजी द्वारा कोयला घोटाले में 142 कोयला खदानों को मनमाने तरीके से आबंटित करने की जिस सरकारी प्रक्रिया पर उंगली उठा के देश को लगभग 1.86 लाख करोड़ का चूना लगने की सनसनीखेज सच्चाई से परिचित कराया है.
कुछ वर्ष पूर्व ठीक उसी प्रक्रिया से उत्तरप्रदेश की मायावती सरकार ने कुछ ख़ास लोगों और कम्पनियों को नोयडा में सैकड़ों करोड़ के फ़ार्महाउस कौड़ियों के मोल आबंटित कर दिए थे.
जिस नोयडा में सरकार का न्यूनतम सर्किल रेट जब 18000 रुपये प्रति वर्ग मीटर था (बाज़ार दर तो इससे कई गुना अधिक थी) तब माया सरकार ने 10,000 वर्ग मीटर प्लॉट वाले 150 फार्महाउस 3.5 करोड़ रुपये में आबंटित कर दिए थे, इसमें भी सुविधा ये दी थी की प्लॉट पाने वाले को प्रारम्भ में केवल 35 लाख रुपये देने थे शेष राशि 16 मासिक किस्तों में चुकानी थी.
जबकि गौर करिए कि न्यूनतम सरकारी सर्किल रेट से ही इन प्लॉटों का मूल्य 18 करोड़ रुपये बनता था, बाज़ार दर से तो इन प्लॉटों की कीमत इससे बहुत अधिक थी. लेकिन माया सरकार ने कृषि कार्य के नाम पर इस कारनामे को अंजाम दिया था.
इन 150 प्लॉटों में से 120 तो निजी कम्पनियों को दिए गए थे और 29 प्लॉट निजी व्यक्तियों को. कमाल देखिये कि इन परम भाग्यशाली 29 व्यक्तियों में शान्ति भूषण और उनके सुपुत्र जयंत भूषण भी शामिल थे.
इस भयंकर फार्महाउस जमीन घोटाले का मामला अब इलाहबाद हाईकोर्ट में है. कुछ सप्ताह पूर्व प्रदेश सरकार को सौंपी गयी अपनी जांच रिपोर्ट में नोयडा अथारिटी के चेयरमैन राकेश बहादुर ने इस फार्महाउस घोटाले से सरकार को 1000 करोड़ की चपत लगने की बात कही है. कुछ दिनों पूर्व ही उत्तरप्रदेश सरकार ने इस पूरे घोटाले की जांच लोकायुक्त को भी सौंप दी है.
अतः कोयला घोटाले के नाम पर नेताओं का घर घेरने को आतुर हो रहे केजरीवाल को इन भूषणों का घर क्यों नहीं दिख रहा...?
ध्यान रहे कि, गरीब किसानों की जमीन को जबरिया अधिग्रहित करने के बाद इस फार्महाउस घोटाले की लूट से सरकारी खजाने को जो 1000 करोड़ रुपये की चपत लगायी गयी थी वो रुपये किसी केजरीवाल या किन्हीं भूषणों की बपौती नहीं थे.
इसके बजाय ये 1000 करोड़ रुपये गरीब किसानों के खून पसीने से सींची गयी जमीन के थे.
अतः क्या फर्क है कोयला घोटाले तथा फार्महाउस घोटाले के दोषियों में..?
फर्क केवल रकम और अवसर का है, नीयत और नीति का नहीं क्योंकि जिसको जितना अवसर मिला उसने उतना हाथ साफ़ किया.

Friday, 24 August 2012

कोटि कोटि नमन....

शिवराम हरी राजगुरू (अगस्त 24, 1908 – मार्च 23, 1931): 
देश की आज़ादी के लिए शहीद होने वाले स्वतंत्रता सेनानी राजगुरु की आज जयंती है. 
कोटि कोटि नमन....  
भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु को
....नमन उस माँ को जिसने जन्म दिया इन वीरो को..

फेसबुक ट्विटर से परेशां है भ्रष्टाचारियों की चहेती "मोना डार्लिंग

ना इज्जत की चिंता, ना फिकर कोई अपमान की, 
जय बोलो बेईमान की
जय बोलो...!!!