Wednesday, 24 July 2013

भैय्या हम भी तो मांग कर सकते हैं ओबामा से, अमरीका से...!!!


भारतीय मान सम्मान स्वाभिमान को अमेरिकी कुत्तों का भोजन बनाती मांग

''इस देश के एक सामान्य नागरिक नहीं बल्कि 
6 करोड़ देशवासियों द्वारा लगातार तीन बार 
दो तिहाई बहुमत से मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए 
नरेन्द्र मोदी को अमेरिका वीजा ना दे......''
भारतीय मान सम्मान स्वाभिमान को 
अमेरिकी कुत्तों का भोजन बनाती यह मांग 
कांग्रेस-कम्युनिस्ट-जदयू-तृणमूल के 
साबिर अली, अनवर अली, रशीद मसूद, 
सुल्तान अहमद, मोहम्मद अदीब 
और उस हैदराबाद वाले असदउद्दीन ओवैसी 
सरीखे मुसलमान सांसदों के नेतृत्व में 
65 सांसदों ने अमेरिका से बाकायदा चिट्ठी लिखकर की है.
जरा ध्यान दीजिये कि इन लोगों ने 
आजतक अमेरिका के बगलबच्चे 
पाकिस्तान की गोद में खुलेआम खेल रहे 
दाउद,हाफ़िज़ सईद सरीखो के खिलाफ कार्रवाई के लिए 
ना तो अमेरिका ना ही पाकिस्तान को 
कभी कोई चिट्ठी नहीं लिखी है.

Friday, 12 July 2013

'धर्मनिरपेक्षता से बहुत बड़ा और पहले है देश...

विश्वविख्यात अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी रायटर ने नरेन्द्र मोदी का साक्षात्कार लिया है.
इस साक्षात्कार में नरेन्द्र मोदी ने प्रचंड दृढ़ता-स्पष्टता व गर्व के साथ सिंहनाद किया है कि ''मैं हिन्दू राष्ट्रवादी हूँ. मैं पैदाइशी हिन्दू हूँ. हिन्दू होना देशभक्त होना कोई गुनाह नहीं है।''
नरेन्द्र मोदी ने यह भी कहा है कि ''धर्मनिरपेक्षता से बहुत बड़ा और पहले है देश''.
मित्रों आज़ाद भारत के इतिहास में किसी राजनेता ने किसी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर स्वयम के हिन्दू होने का सिंहनाद इतनी दृढ़ता-स्पष्टता व गर्व के साथ कभी नहीं किया है. यह ऐतिहासिक घटनाक्रम है हमारा आपका कर्तव्य है कि इतनी ही प्रचंड दृढ़ता-स्पष्टता व गर्व के साथ नरेन्द्र मोदी के इस ऐतिहासिक सिंहनाद के प्रबल समर्थन का इतिहास हम आप रचें. क्योंकि एबीपी न्यूज, NDTV सरीखे चैनलों ने नरेन्द्र मोदी के सिंहनाद को विवादास्पद बयान कहके उसके खिलाफ हिन्दू विरोधी प्रलाप प्रारम्भ कर दिया है.
दरअसल सूअंरों को सुगंध रास नहीं आती, उन्हें उल्टियाँ होने लगती हैं. इसीलिए मीडिया में लोटने वाले सूअंर बेचैन हो गये हैं...

ऐसे होते हैं हिन्दू राष्ट्रवादी...!!!

ऐसे होते हैं हिन्दू राष्ट्रवादी...!!!
उत्तराखंड के आपदा पीड़ितों के लिये 9 जुलाई को अहमदाबाद से एक पूरी रेलगाड़ी राहत सामग्री भरकर रवाना की गयी.
इसमें विशिष्ट तथ्य यह है कि, यह राहत सामग्री नासपीटे और उसकी नासपीटी अम्मा द्वारा झंडी दिखाकर ट्रकों में भरकर राहत सामग्री के नाम पर भेजे गये चीथड़ों और सड़ी-गली खाद्य सामग्री जैसी नहीं है. इसके बजाय गुजरात सरकार ने जनसहयोग से घी, तेल, शक्कर, नमक, मसाले, स्टोव, छाता, टेंट, साबुन, तौलिया, कंघा, नाश्ता, पानी,सरीखी दैनिक प्रयोग/उपयोग वाली 38 वस्तुओं का एक पैकेट बनाकर ऐसे 15 हज़ार पैकेट राहत सामग्री के रूप में भेजें हैं.
गाड़ी रवाना होते समय नासपीटे और उसकी नासपीटी अम्मा की तरह नरेन्द्र मोदी ने ना तो गाड़ी को झंडी दिखाते हुए अपनी फोटो खिंचवायी ना ही बैनर पर अपनी फोटो छपवायी. लेकिन यह खबर आजतक किसी न्यूज चैनल ने नहीं दिखाई, इसके बजाय न्यूज चैनलों का यह ''कुकुर विलाप'' आज भी जारी है कि, मोदी ने उत्तराखंड में केवल गुजरातियों की मदद की.
खबर की पुष्टि के लिए देखें ये लिंक
http://deshgujarat.com/2013/07/09/a-train-full-of-relief-material-for-uttarakhand-leaves-ahmedabad/ 

Wednesday, 3 July 2013

तालिबानी जिहादी गुंडों का मीडिया विभाग भारत में भी बहुत मजबूत...

अब तक लाहौर और कराची से जारी होने वाले बयानों के चलते लश्कर और तालिबान के प्रवक्ताओं उनके मीडिया मैनेजरों से तो परिचित था,
लेकिन पिछले दिनों से कुछ न्यूज चैनलों के एंकरों को अपना एंकरिंग का पेशा छोड़ कर इशरत जहां और उसके पाकिस्तानी आतंकी साथियों के लिए बुरी तरह तड़पते-बिलखते-छटपटाते देखकर यह ज्ञात हुआ कि, लश्कर के आतंकी लफंगों और तालिबानी जिहादी गुंडों का मीडिया विभाग भारत में भी बहुत मजबूत है

Tuesday, 2 July 2013

यूपीए सरकार ने 
सुप्रीम कोर्ट के सामने 
माना है कि देश में 
नैशनल हाइवे प्रॉजेक्ट ने 
वाजपेयी सरकार के 
कार्यकाल में रफ्तार पकड़ी।
पिछले 32 सालों में 
तैयार किए गए 
नैशनल हाइवे का 
आधा हिस्सा 
वाजपेयी सरकार के 
6 साल के 
कार्यकाल में 
तैयार हुआ।
खबर की 
पुष्टि के लिए 
देखें ये लिंक 
http://navbharattimes.indiatimes.com/india/national-india/nda-put-nhs-on-fast-track-centre/articleshow/20874411.cms

Wednesday, 1 May 2013

पिछले 20-25 वर्षों का मेरा अनुभव...

मई दिवस पर ट्रेड यूनियन के दफ्तरों, प्रेस क्लबों में आज जलसों का जलवा होगा.
श्रम दिवस (मई दिवस) की महत्ता के गीत गाये जायेंगे, फोटो खिंचवाए जायेंगे, 
इन आयोजनों में भ्रष्ट से भ्रष्टतम नेताओं को मुख्य अतिथि बनाकर उसके सामने वेतन, भत्ते, छुट्टियों और सुविधाओं का वार्षिक विलाप किया जाएगा. उस नेता से सम्बन्धित भविष्य के जुगाड़ (व्यक्तिगत) ढूंढें जायेंगे 
और अंत में औकात के हिसाब से देसी से लेकर बेहतरीन स्कॉच तक गटकी जायेगी.
लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार २ करोड़ और गैर सरकारी संस्थाओं संस्थानों के अनुसार जो ५ करोड़ बच्चे 12 से 15 घंटे अपना खून पसीना एक करके मिलने वाली शर्मनाक, प्रतीकात्मक मजदूरी से दो वक्त की रोटी का इन्तिज़ाम करते हैं. उनकी व्यथा के बारे में एक शब्द नहीं बोला जाएगा .
पिछले 20-25 वर्षों का मेरा अनुभव तो यही बताता है