Tuesday, 24 April 2012

क्या ये गज़ब की धूर्तता और दोगलापन नहीं है...???


इस फोटो में देश के कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के पास अंतरंगता के साथ बैठा और बतियाता दिखाई दे रहा व्यक्ति सरदार दलजीत सिंह हैं .
पिछले 5 वर्षों से सिर्फ लखनऊ ही नहीं बल्कि पूरे उत्तरप्रदेश में इस सरदार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षा रीता बहुगुणा जोशी के सर्वाधिक निकट एवं विश्वसनीय आर्थिक-राजनीतिक साथी और सहयोगी के रूप में जाना जाता रहा है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य और प्रदेश कांग्रेस का महासचिव रहा है दलजीत सिंह
रीता बहुगुणा की ही पहल पर दलजीत को उत्तरप्रदेश कांग्रेस की कार्यसमिति का सदस्य भी बनाया गया था.
पेशे से ट्रांसपोर्टर इस सरदार दलजीत सिंह का असली परिचय भी अब जान लीजिये.
पिछली 5 फरवरी को इस सरदार दलजीत सिंह के आवास एवं प्रतिष्ठानों पर पड़े सीबीआई के ताबड़तोड़ छापों ने पप्पू नेता और उसकी "पप्पू डांस पार्टी" के दोगलेपन को बुरी तरह बेनकाब कर दिया था.
इसके बाद सोमवार 22 अप्रैल को सीबीआई ने इसे गिरफ्तार किया और मंगलवार 23 अप्रैल को इससे कड़ाई से पूछताछ के लिए कोर्ट ने इसे 5 दिन की पुलिस हिरासत में सौंपा दिया है.
उत्तर प्रदेश में हुए 2200 करोड़ के NRHM घोटाले पर खुद पप्पू नेता और उसकी "पप्पू डांस पार्टी" के नटों-नटनियों द्वारा आज भी जमकर मुहर्रम मनायी जा रही है,
जबकि जिस खाद्यान्न घोटाले के कारण इस सरदार दलजीत सिंह के यहाँ सीबीआई के छापे पड़े और ये खुद भी अब जेल की सलाखों के पीछे पहुँच चुका है, वो लगभग 60 हज़ार करोड़ का है और अनुमान यह है की पूरी जांच होने पर ग़रीबों के हिस्से की रोटी की इस लूट का आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये के आंकडें को पार कर जाएगा.
लेकिन क्या गज़ब की धूर्तता और दोगलापन है....???
पप्पू नेता उसकी प्यारी अम्मी, 2200 करोड़ के NRHM घोटाले के नाम पर छाती पीटते हुए तो मोहर्रमी मातम मनाते हैं, NRHM घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक, बाबू सिंह कुशवाहा के भाजपा प्रवेश पर अब तक उछल कूद रहे हैं लेकिन इस दलजीत सरदार का जिक्र भी नहीं करते हैं.
क्या ये गज़ब की धूर्तता और दोगलापन नहीं है...???

Monday, 23 April 2012

खेद के साथ अंधे अन्ना भक्तों के सूचनार्थ...!!!!!!


अन्ना गैंग के सबसे सदाचारी मेंबर संतोष हेगड़े ने जब कर्नाटक में खनन घोटाले की रिपोर्ट सौंपीं तो उसमे "जिंदल अल्म्युनियम" को उस खनन लूट की सबसे बड़ी हिस्सेदारों में से एक बताया था बाकायदा दस्तावेजी सबूतों के साथ. उस रिपोर्ट से जिंदल कम्पनी का तो कुछ नहीं बिगड़ा लेकिन येदियुरप्पा की कुर्सी जरूर चली गयी थी.
उसके बाद बीती 23 फरवरी को इसी जिंदल अल्म्युनियम के मालिक सीताराम जिंदल ने अपने नाम से बने "सीताराम जिंदल फाउंडेशन" की तरफ से अन्ना हजारे को 25 लाख तथा संतोष हेगड़े को 1 करोड़ के पुरस्कार से नवाज़ा...!!!!!! और देश में ईमानदारी के सबसे बड़े इन दोनों ठेकेदारों ने बाकायदा शान से उस पुरस्कार को ग्रहण किया.
ये फोटो उसी सम्मान समारोह का है. इसमें सीताराम जिंदल के साथ किशन बाबू राव उर्फ़ अन्ना हजारे तथा उसके चेले केजरीवाल के साथ बीच में बैठकर सीताराम जिंदल गप्पें लड़ा रहा है.
अन्ना भक्त इस पोस्ट पर तिल्मिलायेंगें बौखलायेंगे...मुझे झूठा बतायेंगें इसलिए उनके सेवार्थ ये लिंक दे रहा हूँ..
(1) http://www.jindalprize.org/press-release.php
(2) http://www.google.co.in/imgres?q=anna+hazare+sitaram+jindal+foundation&um=1&hl=en&biw=1280&bih=581&tbm=isch&tbnid=mctaw03GWXfWuM%3A&imgrefurl=http%3A%2F%2Fwww.jindalprize.org%2Fphotos.php%3Fid%3D6&docid=GiL_yQKvi19tGM&imgurl=http%3A%2F%2Fwww.jindalprize.org%2Fuploads%2F6%2F783475img_7716.jpg&w=800&h=532&ei=PzyVT-6ML5DkrAeT9digBQ&zoom=1&iact=hc&vpx=250&vpy=285&dur=349&hovh=183&hovw=275&tx=136&ty=94&sig=117484561731336223346&page=1&tbnh=118&tbnw=157&start=0&ndsp=18&ved=1t%3A429%2Cr%3A13%2Cs%3A0%2Ci%3A93
अब अन्ना भक्त भी समझ लें कि, उनकी अंधी भक्ति का मतलब है कि,
नक्सली समस्या के नाम पर 20000 निर्दोषों के हत्यारों और उनके झंडाबरदार दलालों की जय बोलो...
देश के दो टुकड़े कर देने की सलाह देने वाले, भारतीय सेना को गाली देने वाले, अफज़ल की फांसी माफ़ कराने की कोशिश करने वालों की जय बोलो...
भगवन शंकर का मज़ाक उड़ाने वाले भांड कुमार विश्वास और अग्निवेश सरीखों की जय बोलो ....
मायावती सरकार से 35 करोड़ की जमीन केवल 20 लाख में लेने वाले बाप-बेटों की जय बोलो....
20 करोड़ के मकान को केवल 90000 में खरीदा गया बता कर राजस्व की चोरी करने वालों और 20 करोड़ का भुगतान नम्बर दो में करने वालों की जय बोलो....
झूठ बोलकर फर्जी बिल लगाकर 5 हज़ार के हवाई टिकट का किराया 19 हज़ार वसूलने वालों की जय बोलो.......
इन सबकी जय इसलिए बोलो क्योंकि ये कह रहे हैं की लोकपाल लाओ....!!!!!!!इन सबकी जय इसलिए बोलो क्योंकि कुछ मूर्खों को ये लगता है की ये देशहित में
भ्रष्टाचार के खिलाफ सत्य की सदाचार की लड़ाई लड़ रहे हैं.

Sunday, 22 April 2012

ये टीम अन्ना है या चोरों, तस्करों, देशद्रोहियों का गिरोह...?

जिस तरह किसी डकैत गिरोह में लूट के माल के बंटवारे को लेकर आपस में गोलियां चलती हैं कुछ उसी तरह वाहवाही की लूट में बराबर की बन्दरबांट ना होने-करने को लेकर अन्ना गैंग में हो रही आपसी जूतमपैजार ने एक बार फिर इस गिरोह के चाल चरित्र चेहरे के कफ़न को नोंच कर फेंक दिया है. अब अपने गैंग के ही गुर्गे मौलाना काजमी पर गिरोह की गुप्त बैठक में तैयार हो रही साजिशों को रिकॉर्ड करने का आरोप ये गैंग लगा रहा है.
याद दिलाता चलूँ की ये वही गैंग है जो हर सरकारी मीटिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग करवाने उसको देश को दिखाने की अपनी मांग को लेकर टीवी कैमरों के सामने बंदरों की तरह उछलता कूदता था.
अब इस गिरोह से देश भी यह जानना चाहता है की इस गिरोह की मीटिंग में ऐसा कौन सा "नीच" काम हो रहा था जिसको रिकॉर्ड करने की बात पर गिरोह की जूतमपैजार खुलेआम हो रही है..

Thursday, 19 April 2012

स्व. दुष्यंत जी को याद करते हुए......


सत्ता के पागल हाथी पर सवार  चंद सिरफिरे सियासी शैतानों ने 
आम आदमी की आवाज़ उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को
अपने अहंकार के अंकुश से संचालित करने का जो षड्यंत्र रचा
उसे आंशिक सफलता ही प्राप्त हो सकी. "जय" अंततः "जन" की ही हुई. फेसबुक के मंच को
अपने चाटुकारों की चौपाल बनाने का दिवास्वप्न देखने वाले
चुनिन्दा सियासी दैत्यों की इस शर्मनाक असफलता पर
आप सभी राष्ट्रप्रेमी मित्रों को कोटि-कोटि बधाई.
पिछले दिनों जिस प्रकार से फेसबुक को अपने हंटर से हांकने का दुष्प्रयास किया गया वह भयावह भविष्य का भावी संकेत है. 

अतः हम सभी को पूर्व की अपेक्षा अधिक सजग सतर्क रहना होगा.
28 फरवरी को ब्लॉक किया गया मेरा अकाउंट आज से एक्टिव हुआ है. अतः ठीक 50 दिन पश्चात् जनकवि स्व. दुष्यंत को याद करते हुए उन की दो कविताओं के साथ आप सभी साथियों के मध्य पुनः उपस्थित हो रहा हूँ.
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हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
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अब किसी को भी नज़र आती नहीं कोई दरार
घर की हर दीवार पर चिपके हैं इतने इश्तहार

आप बच कर चल सकें ऐसी कोई सूरत नहीं
रहगुज़र घेरे हुए मुर्दे खड़े हैं बेशुमार

रोज़ अखबारों में पढ़कर यह ख़्याल आया हमें
इस तरफ़ आती तो हम भी देखते फ़स्ले—बहार

मैं बहुत कुछ सोचता रहता हूँ पर कहता नहीं
बोलना भी है मना सच बोलना तो दरकिनार

इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके—जुर्म हैं
आदमी या तो ज़मानत पर रिहा है या फ़रार

हालते—इन्सान पर बरहम न हों अहले—वतन
वो कहीं से ज़िन्दगी भी माँग लायेंगे उधार

रौनक़े-जन्नत ज़रा भी मुझको रास आई नहीं
मैं जहन्नुम में बहुत ख़ुश था मेरे परवरदिगार

दस्तकों का अब किवाड़ों पर असर होगा ज़रूर
हर हथेली ख़ून से तर और ज़्यादा बेक़रार

Tuesday, 28 February 2012

जनलोकपाली ज्वर से बौरा चुके अंधे अन्ना भक्तों के सूचनार्थ...

जनलोकपाली ज्वर से बौरा चुके अंधे अन्ना भक्तों के सूचनार्थ बता दूं कि,
किशन बाबूराव हजारे उर्फ़ "अन्ना" दर्ज़नों बार कसमें खाने और दावे करने के बावजूद 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करने क्यों नहीं गया...???
इन पाँचों राज्यों के चुनावों के दौरान कांग्रेस या केंद्र सरकार उसके भ्रष्टाचार के खिलाफ एक उसने एक शब्द भी क्यों नहीं बोला...???
इन पाँचों राज्यों के चुनावों के दौरान गूंगे-बहरों की तरह खामोशी का कफन ओढकर कांग्रेस और उसकी केंद्र सरकार के भयंकर भ्रष्टाचार खिलाफ वो मुर्दों की तरह मौन क्यों रहा...???
इन पाँचों राज्यों के चुनावों के दौरान उसने कांग्रेस और उसके भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई अपील तक लिखकर क्यों नहीं जारी की...?
क्या उसे बुखार के साथ साथ लकवा भी मार गया था...???
दरअसल उसने यह सब यूं ही नहीं किया था. अभी 5 दिन पहले ही उसे सीताराम जिंदल फाउंडेशन ने 25 लाख के पुरस्कार से सम्मानित किया है.
सिर्फ वही नहीं उसके गैंग के संतोष हेगड़े को एक करोड़ तथा मनीष सिसोदिया को भी दस लाख के पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
अंधे अन्ना भक्त अपनी अकल के जंग लगे खिड़की दरवाज़े खोलने के लिए यह और जान लें कि इस अन्ना को 25 लाख और उसके गैंग अन्ना के जिस संतोष हेगड़े को एक करोड़ का पुरस्कार जिस सीताराम जिंदल ने अपने फाउंडेशन से दिया है उसी सीताराम जिंदल कि कम्पनी "जिंदल अल्म्युनियम " को कर्नाटक में अरबों खरबों का अवैध खनन करके जनता की संपत्ति को लूटने का दोषी इसी संतोष हेगड़े ने घोषित किया था. अप्रैल में भी जिंदल की इसी कम्पनी ने अन्ना के जनलोकपाली गोरखधंधे के लिए 25 लाख का चदा दिया था.
अब यह भी बता दूं की ये सीताराम जिंदल जी राहुल ब्रिगेड के महत्वपूर्ण सदस्य और कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल जी के चाचा श्री हैं...!!!
अन्धें अन्ना भक्तों के लिए एक सूचना और की इस 25 लाख की राशि को किशन बाबूराव ने तत्काल "दान " कर दिया. उसने यह दान किसी अनाथालय, ग़रीबों के चिकित्सालय या विध्यालय, या फिर कुष्ठ आश्रम को नहीं दिया.
बल्कि उसने यह दान उस स्वराज ट्रस्ट को दिया जिसका कर्ताधर्ता वो खुद ही है...!!!
सूचना की PUSHTI नीचे दिए गए दोनों लिंकों पर जाकर करिए
(1)http://www.bhaskar.com/article/DEL-anna-and-the-president-including-the-27-jindal-awards-2903468.html
(2)http://rashtriyagarima.in/details1.php?nid=1888&catid=25&pid=0

Monday, 27 February 2012

इनसे इसलिए सावधान रहिये......


दरअसल उत्तरप्रदेश में पप्पू नेता की डांस पार्टी की जबर्दस्त फजीहत होना सुनिश्चित हो चुका है.
बिहार की ही तरह उत्तरप्रदेश में भी पप्पू नेता बुरी तरह फेल होने जा रहा है.
कुछ मीडियायी भांडों ने और उसकी डांस पार्टी के नटों-नर्तकों ने पप्पू नेता की जयजय कार करने में निर्लज्जता और धूर्तता के सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए थे. लेकिन अब इस पूरी कुकर्मी कवायद का परिणाम आना जा रहा है, इनकी धूर्तता उजागर होने जा रही है. इसलिए पप्पू के रिजल्ट पर ज्यादा चर्चा ना हो इसके लिए सरकार प्रायोजित "जनलोकपाली" जमूरों और मदारियों का गैंग अभी से मैदान में कूद पडा है.
क्योंकि जनलोकपाली तमाशा दिखाने मुंबई पहुंचे इस गैंग के कपडे तो जनता ने उतार ही दिए थे, जैसे-तैसे बीमारी का बहाना कर के लंगोटी बची थी.
इसलिए इस बार ये गैंग "राईट टू रिजेक्ट" नाम का डमरू बजा कर एक नया ड्रामा दिखाने का एलान कर रहा है. इस ड्रामे के सस्ते और अश्लील प्रचार के लिए इसके सबसे शातिर जमूरे ने एक बार फिर इस देश की संसद संविधान और लोकतान्त्रिक प्रावधान पर गाली-गलौज के साथ हमले करना शुरू कर दिया है.
चुनावों के 2 महीनों तक इस गैंग से पूरी तरह बेज़ार रहे मीडियायी भांड भी इन्हें घंटों अपने स्टूडियो में बैठाकर इनका भोंपूँ बजा रहे हैं.

पूजे न शहीद गए तो फिर, यह पंथ कौन अपनाएगा..?





भारत माँ के अज़र अमर राष्ट्रपुत्र 
चंद्रशेखर आज़ाद ने 27 फरवरी 1931 को 
स्वतंत्रता के राष्ट्रयज्ञ में 
अपने प्राणों की आहुति दी थी.
इस परमवीर बलिदानी "राष्ट्ररत्न" को 

उनकी पुण्यतिथि पर शत शत नमन...!!!
श्रद्धेय कवि "श्रीकृष्ण सरल" जी की इन पंक्तियों के द्वारा इस अतुलनीय "राष्ट्ररत्न" को 

भावभीनी श्रद्धांजलि.........

मैं अमर शहीदों का चारण
उनके गुण गाया करता हूँ
जो कर्ज राष्ट्र ने खाया है,
मैं उसे चुकाया करता हूँ।


यह सच है, याद शहीदों की हम लोगों ने दफनाई है
यह सच है, उनकी लाशों पर चलकर आज़ादी आई है,
यह सच है, हिन्दुस्तान आज जिन्दा उनकी कुर्वानी से
यह सच अपना मस्तक ऊँचा उनकी बलिदान कहानी से।


वे अगर न होते तो भारत मुर्दों का देश कहा जाता,
जीवन ऍसा बोझा होता जो हमसे नहीं सहा जाता,
यह सच है दाग गुलामी के उनने लोहू सो धोए हैं,
हम लोग बीज बोते, उनने धरती में मस्तक बोए हैं।
इस पीढ़ी में, उस पीढ़ी के
मैं भाव जगाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चारण
उनके यश गाया करता हूँ।


यह सच उनके जीवन में भी रंगीन बहारें आई थीं,
जीवन की स्वप्निल निधियाँ भी उनने जीवन में पाई थीं,
पर, माँ के आँसू लख उनने सब सरस फुहारें लौटा दीं,
काँटों के पथ का वरण किया, रंगीन बहारें लौटा दीं।


उनने धरती की सेवा के वादे न किए लम्बे—चौड़े,
माँ के अर्चन हित फूल नहीं, वे निज मस्तक लेकर दौड़े,
भारत का खून नहीं पतला, वे खून बहा कर दिखा गए,
जग के इतिहासों में अपनी गौरव—गाथाएँ लिखा गए।
उन गाथाओं से सर्दखून को
मैं गरमाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चरण
उनके यश गाया करता हूँ।


है अमर शहीदों की पूजा, हर एक राष्ट्र की परंपरा
उनसे है माँ की कोख धन्य, उनको पाकर है धन्य धरा,
गिरता है उनका रक्त जहाँ, वे ठौर तीर्थ कहलाते हैं,
वे रक्त—बीज, अपने जैसों की नई फसल दे जाते हैं।


इसलिए राष्ट्र—कर्त्तव्य, शहीदों का समुचित सम्मान करे,
मस्तक देने वाले लोगों पर वह युग—युग अभिमान करे,
होता है ऍसा नहीं जहाँ, वह राष्ट्र नहीं टिक पाता है,
आजादी खण्डित हो जाती, सम्मान सभी बिक जाता है।
यह धर्म—कर्म यह मर्म
सभी को मैं समझाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चरण
उनके यश गाया करता हूँ।


पूजे न शहीद गए तो फिर, यह पंथ कौन अपनाएगा?
तोपों के मुँह से कौन अकड़ अपनी छातियाँ अड़ाएगा?
चूमेगा फन्दे कौन, गोलियाँ कौन वक्ष पर खाएगा?
अपने हाथों अपने मस्तक फिर आगे कौन बढ़ाएगा?


पूजे न शहीद गए तो फिर आजादी कौन बचाएगा?
फिर कौन मौत की छाया में जीवन के रास रचाएगा?
पूजे न शहीद गए तो फिर यह बीज कहाँ से आएगा?
धरती को माँ कह कर, मिट्टी माथे से कौन लगाएगा?
मैं चौराहे—चौराहे पर
ये प्रश्न उठाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चारण
उनके यश गाया करता हूँ।
जो कर्ज ने खाया है, मैं चुकाया करता हूँ।