Friday, 28 December 2012
Thursday, 27 December 2012
सत्ता सेवक ''न्यूज चैनलों'' और केजरीवाल गैंग के षड्यंत्र को समझिये
दिल्ली में हुई गैंगरेप की जघन्यतम अपराधिक घटना तथा तत्पश्चात उसके खिलाफ दिल्ली के ''राजपथ'' पर बहे प्रचंड जनाक्रोश के ऐतिहासिक लावे के मुख्य मुद्दों, गंभीर मांगों के खिलाफ पिछले दो तीन दिनों से ''सरकारी सेवक'' सरीखे न्यूज चैनलों ने शर्मनाक षड्यंत्र प्रारम्भ किया है . इन दिनों राजनीतिक मैदान में कांग्रेस के सेफ्टी वाल्व की भूमिका निभा रहे केजरीवाल गैंग ने इस षड्यंत्र की सफलता के लिए इन न्यूज चैनलों का जमकर साथ दिया है .
परिणाम स्वरुप पूरे देश को अतल गहराईयों तक हिलाकर रख देने वाली गैंगरेप की जघन्यतम अपराधिक घटना को न्यूजचैनलों ने केजरीवाल गैंग बनाम दिल्ली पुलिस के बीच बयानों की नूराकुश्ती में बदल डाला है .
गैंगरेप की जघन्यतम अपराधिक घटना के प्रशासनिक, राजनीतिक, नैतिक, सैद्धांतिक जिम्मेदारों/अपराधियों के बचाव के लिए केजरीवाल और न्यूजचैनलों की जुगलबंदी ने पिछले तीन चार दिनों से देश की आँखों में दिल्ली पुलिस और केजरीवाल गैंग के बीच बयानों की लड़ाई की धूल जमकर झोंकने का सियासी षड्यंत्र प्रारम्भ कर दिया है..... जबकि यह लड़ाई कोई मुद्दा ही नहीं है।....
ज्ञात रहे कि, दिल्ली में गैंग रेप की घटना के पश्चात उमड़ा युवा जनाक्रोश केवल उस एक घटना के खिलाफ धधका जनाक्रोश मात्र नहीं था,
देश की राजधानी दिल्ली पिछले कई वर्षों से बलात्कारियों का अभयारण्य बनी हुई है .
स्वयं नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के पिछले 5 सालों के आंकडें बताते हैं कि दिल्ली में 2008 में 466, 2009 में 459, 2010 में 489, 2011 में 570 और 2012 की 15 दिसंबर तक 661 बलात्कार की जघन्य अपराधिक घटनाएँ घटित हुईं हैं, 2011 में जारी हुए एक सरकारी आंकडें के अनुसार वर्ष 2010 में देश के 35 प्रमुख महानगरों में महिलाओं के अपहरण और उनके साथ बलात्कार की जो घटनाएँ घटित हुई थीं उनमें से 37.7 प्रतिशत घटनाएँ केवल दिल्ली में ही घटित हुईं थी . इसके बावजूद दिल्ली राज्य सरकार तथा जिस केंद्र सरकार के हाथों में दिल्ली पुलिस की कमान है, उन दोनों सरकारों के धृतराष्ट्र सरीखे कर्णधारों की कुम्भकरणी नींद जब नहीं टूटी तब पिछले दिनों जनाक्रोश के ज्वालामुखी का उबलता लावा दिल्ली की सड़कों पर अपनी पूरी प्रचंडता से बहता दिखा
गैंग रेप की घटना वर्षों से बढ़ रहे जनाक्रोश के इस ज्वालामुखी में विस्फोट का निर्णायक कारण बन गयी .
अतः सत्ता संचालन की कमान थामे सियासी धृतराष्ट्रों ने अपनी शर्मनाक अकर्मण्यता असफलता के खिलाफ फूटे प्रचंड जनाक्रोश को अपने दमन चक्र से दबाने-कुचलने का दानवी प्रयास किया .
इसमें बुरी तरह असफल होने पर उसके सेफ्टी वाल्व ने यह मोर्चा संभाला, इस जनांदोलन में केजरीवाल गैंग की घुसपैठ के साथ ही भड़की हिंसा में दिल्ली पुलिस के एक जवान की मौत के साथ ही सारा नज़ारा बदल गया .
पूर्व निर्धारित षड्यंत्र के अनुसार 'सरकारी सेवक'' सरीखे न्यूज चैनलों ने गैंगरेप की जघन्यतम अपराधिक घटना के प्रशासनिक, राजनीतिक, नैतिक, सैद्धांतिक जिम्मेदारों/अपराधियों के खिलाफ खबरें दिखने उनपर चर्चा करने के बजाय दिल्ली पुलिस और केजरीवाल गैंग के बीच शुरू हुई जुबानी जंग का प्रचार प्रसार रातदिन इस तरह प्रारम्भ कर दिया है मानों लाखों लोग इसी जंग के लिए सडकों पर निकल पड़े थे, जबकि हास्यास्पद शर्मनाक सच्चाई यह है कि दिल्ली पुलिस ने पूर्व सेनाध्यक्ष वी।के। सिंह तथा बाबा रामदेव जैसों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज़ किये हैं लेकिन खुद केजरीवाल या उसके गैंग के किसी छुटभैय्ये नेता के खिलाफ एक भी केस दर्ज़ नहीं किया है। यही नहीं दिल्ली पुलिस ने पूर्व सेनाध्यक्ष वी।के। सिंह तथा बाबा रामदेव को तो गिरफ्तार कर उन्हें प्रदर्शनकारियों के बीच जाने से रोक दिया था लेकिन खुद केजरीवाल और उसके गैंग के नेताओं को प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर भाषण देने की खुली छूट दे रखी थी ......
दरअसल ऐसा पहली बार नहीं हुआ है ... केजरीवाल गैंग-कांग्रेस सरकार-न्यूज चैनलों की तिकड़ी की यह पहली करतूत नहीं है .
याद करिए पिछले वर्ष देश में 2ग च्वग सरीखे लाखों करोड़ के घोटालों तथा खुद सीबी आई के निदेशक द्वारा विदेशों में जमा 20 लाख करोड़ के कालेधन की स्वीकारोक्ति के पश्चात देश में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के खिलाफ देशव्यापी जनाक्रोश की कितनी ऊंची और प्रचंड लहरें बह रही थीं, उसी समय ये केजरीवाल गैंग अपना ''जनलोकपाली थियेटर'' लेकर मैदान में कूद पड़ा था. ''सत्ता सेवक'' न्यूज चैनलों में बैठे चाटुकार पत्रकारों ने तब भी देश की आँखों में जनलोकपाली धूल जमकर झोंकी थी . आज उस ''जनलोकपाल'' का कोई जिक्र भी कहीं नहीं होता .
Monday, 26 November 2012
Friday, 23 November 2012
ये पिछले 3 सालों से चुप्पी क्यों साधे था...???
ये
है वो आर पी सिंह जो डीजी (पोस्ट ऐंड टेलिकम्युनिकेशन्स) के पद से सितंबर
2011 में रिटायर हुआ था, ये पिछले 3 सालों से चुप्पी साधे था लेकिन कल
इसको अचानक दौरा पडा और अब इसका कहना है कि, कोई 2G घोटाला नहीं हुआ था
क्योंकि सरकार को केवल लगभग 2100 करोड़ का ही नुक्सान हुआ था, 1.76 लाख करोड़
के नुक्सान की बात केवल गप्प है ऐसा कोई नुक्सान नहीं हुआ। इसके बयान के
तुरंत बाद सोनिया गांधी का उछलता कूदता बयान आ गया कि, अब सच सामने आ गया है और भाजपा बेनकाब हो गयी है।
हालांकि आर पी सिंह के इस बयान के बाद उसको तत्काल या तो पागलखाने भेज
दिया जाए या फिर जेलखाने भेजा जाए, क्योंकि जिस घोटाले की जांच खुद सुप्रीम
कोर्ट ने अपनी निगरानी में करवाई और दूर संचार मंत्री ए।राजा समेत दर्जनों
कार्पोरेट दिग्गजों को महीनों तक जेल में बंद रखा था तब ये आर पी सिंह चुप
क्यों था? अतः या तो ये पागल है या फिर इस देश, इस देश की सुप्रीम कोर्ट
और महीनों तक जेल में रहे दर्जनों दिग्गजों से सच और साक्ष्य छुपाने का घोर
अपराधी है ये। और रही बात सोनिया की तो उसने तो अपने बयान से भाजपा के
बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट पर ही हमला बोला है। ताज्जुब देखिये कि, सोनिया
को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर शर्म कभी नहीं आई लेकिन इसके बयान पर वो
फूली नहीं समायी.
कांग्रेसी नेताओं की औलादों,दामादों और सालों को बचाने के लिए दर्ज़नों आतंकवादी क्यों छोड़े गए थे...???
पहले
बीती 21 नवम्बर को कपिल सिब्बल और कांग्रेसी प्रवक्ता संजय निरूपम ने फिर
22 नवम्बर को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने कंधार कांड
में छोड़े गए आतंकियों को लेकर भाजपा पर तीखा आक्रमण किया है। अतः सिब्बल दिग्विजय और निरूपम को केवल पांच प्रकरण याद दिलाना चाहूँगा
पहला है वो ''तसद्दुक देव'' जो वर्तमान केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद का ''साला'' है और जिसका 1991 में ही अपहरण किया गया था
पहला है वो ''तसद्दुक देव'' जो वर्तमान केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद का ''साला'' है और जिसका 1991 में ही अपहरण किया गया था
और उसे छुड़ाने के लिए तीन दुर्दांत आतंकवादियों को केंद्र की तत्कालीन केंद्र सरकार ने छोड़ दिया था।
दूसरा है वो ''नाहिदा सोज़'' जो वर्तमान केन्द्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज़ की सुपुत्री है और जिसका अपहरण 1991 में ही किया किया गया और उसे छुड़ाने के लिए 5 दुर्दांत आतंकवादियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था
तीसरा है वो ''मुस्तफा असलम'' जो जम्मू-काश्मीर प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष गुलाम रसूल कार का दामाद था और जिसका 1992 में अपहरण किया गया था और जिसको छुड़ाने के किये 3 दुर्दांत आतंकियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था।
चौथा है वो नसरुल्लाह जो पूर्व मंत्री जी एम् मीर लासजन का सुपुत्र था जिसका 1992 में अपहरण कर लिया गया था और जिसे छुड़ाने के लिए 7 दुर्दांत आतंकवादियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था।
पांचवां है, एक सप्ताह तक हज़रत बल में दावत-ए-बिरयानी देने के बाद दर्जनों पाकिस्तानी आतंकियों को वापस पकिस्तान भाग जाने का सेफ पैसेज देने के लिए सेना को मजबूर करने वाली केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार का वह कुकर्म जिसे देश आज भी नहीं भूला है। उल्लेखनीय है कि, ये फैसले लेने वाली कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार के वित्त मंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री शरद पवार और विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ही थे, गुलाम नबी आज़ाद भी संसदीय कार्य/उड्डयन मंत्री थे।
अतः कांधार में 166 निरीह-निर्दोष-निरपराध विमान यात्रियों के बदले 3 आतंकियों को छोड़ने पर आगबबूला होने का ढोंग पाखंड करने वाली कांग्रेस से देश जानना चाहता है कि, कांग्रेसी नेताओं की औलादों,दामादों और सालों को बचाने के लिए दर्ज़नों आतंकवादी क्यों छोड़े गए थे...???
दूसरा है वो ''नाहिदा सोज़'' जो वर्तमान केन्द्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज़ की सुपुत्री है और जिसका अपहरण 1991 में ही किया किया गया और उसे छुड़ाने के लिए 5 दुर्दांत आतंकवादियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था
तीसरा है वो ''मुस्तफा असलम'' जो जम्मू-काश्मीर प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष गुलाम रसूल कार का दामाद था और जिसका 1992 में अपहरण किया गया था और जिसको छुड़ाने के किये 3 दुर्दांत आतंकियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था।
चौथा है वो नसरुल्लाह जो पूर्व मंत्री जी एम् मीर लासजन का सुपुत्र था जिसका 1992 में अपहरण कर लिया गया था और जिसे छुड़ाने के लिए 7 दुर्दांत आतंकवादियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था।
पांचवां है, एक सप्ताह तक हज़रत बल में दावत-ए-बिरयानी देने के बाद दर्जनों पाकिस्तानी आतंकियों को वापस पकिस्तान भाग जाने का सेफ पैसेज देने के लिए सेना को मजबूर करने वाली केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार का वह कुकर्म जिसे देश आज भी नहीं भूला है। उल्लेखनीय है कि, ये फैसले लेने वाली कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार के वित्त मंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री शरद पवार और विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ही थे, गुलाम नबी आज़ाद भी संसदीय कार्य/उड्डयन मंत्री थे।
अतः कांधार में 166 निरीह-निर्दोष-निरपराध विमान यात्रियों के बदले 3 आतंकियों को छोड़ने पर आगबबूला होने का ढोंग पाखंड करने वाली कांग्रेस से देश जानना चाहता है कि, कांग्रेसी नेताओं की औलादों,दामादों और सालों को बचाने के लिए दर्ज़नों आतंकवादी क्यों छोड़े गए थे...???
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