Wednesday, 1 May 2013

पिछले 20-25 वर्षों का मेरा अनुभव...

मई दिवस पर ट्रेड यूनियन के दफ्तरों, प्रेस क्लबों में आज जलसों का जलवा होगा.
श्रम दिवस (मई दिवस) की महत्ता के गीत गाये जायेंगे, फोटो खिंचवाए जायेंगे, 
इन आयोजनों में भ्रष्ट से भ्रष्टतम नेताओं को मुख्य अतिथि बनाकर उसके सामने वेतन, भत्ते, छुट्टियों और सुविधाओं का वार्षिक विलाप किया जाएगा. उस नेता से सम्बन्धित भविष्य के जुगाड़ (व्यक्तिगत) ढूंढें जायेंगे 
और अंत में औकात के हिसाब से देसी से लेकर बेहतरीन स्कॉच तक गटकी जायेगी.
लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार २ करोड़ और गैर सरकारी संस्थाओं संस्थानों के अनुसार जो ५ करोड़ बच्चे 12 से 15 घंटे अपना खून पसीना एक करके मिलने वाली शर्मनाक, प्रतीकात्मक मजदूरी से दो वक्त की रोटी का इन्तिज़ाम करते हैं. उनकी व्यथा के बारे में एक शब्द नहीं बोला जाएगा .
पिछले 20-25 वर्षों का मेरा अनुभव तो यही बताता है