Tuesday, 28 February 2012

जनलोकपाली ज्वर से बौरा चुके अंधे अन्ना भक्तों के सूचनार्थ...

जनलोकपाली ज्वर से बौरा चुके अंधे अन्ना भक्तों के सूचनार्थ बता दूं कि,
किशन बाबूराव हजारे उर्फ़ "अन्ना" दर्ज़नों बार कसमें खाने और दावे करने के बावजूद 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करने क्यों नहीं गया...???
इन पाँचों राज्यों के चुनावों के दौरान कांग्रेस या केंद्र सरकार उसके भ्रष्टाचार के खिलाफ एक उसने एक शब्द भी क्यों नहीं बोला...???
इन पाँचों राज्यों के चुनावों के दौरान गूंगे-बहरों की तरह खामोशी का कफन ओढकर कांग्रेस और उसकी केंद्र सरकार के भयंकर भ्रष्टाचार खिलाफ वो मुर्दों की तरह मौन क्यों रहा...???
इन पाँचों राज्यों के चुनावों के दौरान उसने कांग्रेस और उसके भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई अपील तक लिखकर क्यों नहीं जारी की...?
क्या उसे बुखार के साथ साथ लकवा भी मार गया था...???
दरअसल उसने यह सब यूं ही नहीं किया था. अभी 5 दिन पहले ही उसे सीताराम जिंदल फाउंडेशन ने 25 लाख के पुरस्कार से सम्मानित किया है.
सिर्फ वही नहीं उसके गैंग के संतोष हेगड़े को एक करोड़ तथा मनीष सिसोदिया को भी दस लाख के पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
अंधे अन्ना भक्त अपनी अकल के जंग लगे खिड़की दरवाज़े खोलने के लिए यह और जान लें कि इस अन्ना को 25 लाख और उसके गैंग अन्ना के जिस संतोष हेगड़े को एक करोड़ का पुरस्कार जिस सीताराम जिंदल ने अपने फाउंडेशन से दिया है उसी सीताराम जिंदल कि कम्पनी "जिंदल अल्म्युनियम " को कर्नाटक में अरबों खरबों का अवैध खनन करके जनता की संपत्ति को लूटने का दोषी इसी संतोष हेगड़े ने घोषित किया था. अप्रैल में भी जिंदल की इसी कम्पनी ने अन्ना के जनलोकपाली गोरखधंधे के लिए 25 लाख का चदा दिया था.
अब यह भी बता दूं की ये सीताराम जिंदल जी राहुल ब्रिगेड के महत्वपूर्ण सदस्य और कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल जी के चाचा श्री हैं...!!!
अन्धें अन्ना भक्तों के लिए एक सूचना और की इस 25 लाख की राशि को किशन बाबूराव ने तत्काल "दान " कर दिया. उसने यह दान किसी अनाथालय, ग़रीबों के चिकित्सालय या विध्यालय, या फिर कुष्ठ आश्रम को नहीं दिया.
बल्कि उसने यह दान उस स्वराज ट्रस्ट को दिया जिसका कर्ताधर्ता वो खुद ही है...!!!
सूचना की PUSHTI नीचे दिए गए दोनों लिंकों पर जाकर करिए
(1)http://www.bhaskar.com/article/DEL-anna-and-the-president-including-the-27-jindal-awards-2903468.html
(2)http://rashtriyagarima.in/details1.php?nid=1888&catid=25&pid=0

Monday, 27 February 2012

इनसे इसलिए सावधान रहिये......


दरअसल उत्तरप्रदेश में पप्पू नेता की डांस पार्टी की जबर्दस्त फजीहत होना सुनिश्चित हो चुका है.
बिहार की ही तरह उत्तरप्रदेश में भी पप्पू नेता बुरी तरह फेल होने जा रहा है.
कुछ मीडियायी भांडों ने और उसकी डांस पार्टी के नटों-नर्तकों ने पप्पू नेता की जयजय कार करने में निर्लज्जता और धूर्तता के सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए थे. लेकिन अब इस पूरी कुकर्मी कवायद का परिणाम आना जा रहा है, इनकी धूर्तता उजागर होने जा रही है. इसलिए पप्पू के रिजल्ट पर ज्यादा चर्चा ना हो इसके लिए सरकार प्रायोजित "जनलोकपाली" जमूरों और मदारियों का गैंग अभी से मैदान में कूद पडा है.
क्योंकि जनलोकपाली तमाशा दिखाने मुंबई पहुंचे इस गैंग के कपडे तो जनता ने उतार ही दिए थे, जैसे-तैसे बीमारी का बहाना कर के लंगोटी बची थी.
इसलिए इस बार ये गैंग "राईट टू रिजेक्ट" नाम का डमरू बजा कर एक नया ड्रामा दिखाने का एलान कर रहा है. इस ड्रामे के सस्ते और अश्लील प्रचार के लिए इसके सबसे शातिर जमूरे ने एक बार फिर इस देश की संसद संविधान और लोकतान्त्रिक प्रावधान पर गाली-गलौज के साथ हमले करना शुरू कर दिया है.
चुनावों के 2 महीनों तक इस गैंग से पूरी तरह बेज़ार रहे मीडियायी भांड भी इन्हें घंटों अपने स्टूडियो में बैठाकर इनका भोंपूँ बजा रहे हैं.

पूजे न शहीद गए तो फिर, यह पंथ कौन अपनाएगा..?





भारत माँ के अज़र अमर राष्ट्रपुत्र 
चंद्रशेखर आज़ाद ने 27 फरवरी 1931 को 
स्वतंत्रता के राष्ट्रयज्ञ में 
अपने प्राणों की आहुति दी थी.
इस परमवीर बलिदानी "राष्ट्ररत्न" को 

उनकी पुण्यतिथि पर शत शत नमन...!!!
श्रद्धेय कवि "श्रीकृष्ण सरल" जी की इन पंक्तियों के द्वारा इस अतुलनीय "राष्ट्ररत्न" को 

भावभीनी श्रद्धांजलि.........

मैं अमर शहीदों का चारण
उनके गुण गाया करता हूँ
जो कर्ज राष्ट्र ने खाया है,
मैं उसे चुकाया करता हूँ।


यह सच है, याद शहीदों की हम लोगों ने दफनाई है
यह सच है, उनकी लाशों पर चलकर आज़ादी आई है,
यह सच है, हिन्दुस्तान आज जिन्दा उनकी कुर्वानी से
यह सच अपना मस्तक ऊँचा उनकी बलिदान कहानी से।


वे अगर न होते तो भारत मुर्दों का देश कहा जाता,
जीवन ऍसा बोझा होता जो हमसे नहीं सहा जाता,
यह सच है दाग गुलामी के उनने लोहू सो धोए हैं,
हम लोग बीज बोते, उनने धरती में मस्तक बोए हैं।
इस पीढ़ी में, उस पीढ़ी के
मैं भाव जगाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चारण
उनके यश गाया करता हूँ।


यह सच उनके जीवन में भी रंगीन बहारें आई थीं,
जीवन की स्वप्निल निधियाँ भी उनने जीवन में पाई थीं,
पर, माँ के आँसू लख उनने सब सरस फुहारें लौटा दीं,
काँटों के पथ का वरण किया, रंगीन बहारें लौटा दीं।


उनने धरती की सेवा के वादे न किए लम्बे—चौड़े,
माँ के अर्चन हित फूल नहीं, वे निज मस्तक लेकर दौड़े,
भारत का खून नहीं पतला, वे खून बहा कर दिखा गए,
जग के इतिहासों में अपनी गौरव—गाथाएँ लिखा गए।
उन गाथाओं से सर्दखून को
मैं गरमाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चरण
उनके यश गाया करता हूँ।


है अमर शहीदों की पूजा, हर एक राष्ट्र की परंपरा
उनसे है माँ की कोख धन्य, उनको पाकर है धन्य धरा,
गिरता है उनका रक्त जहाँ, वे ठौर तीर्थ कहलाते हैं,
वे रक्त—बीज, अपने जैसों की नई फसल दे जाते हैं।


इसलिए राष्ट्र—कर्त्तव्य, शहीदों का समुचित सम्मान करे,
मस्तक देने वाले लोगों पर वह युग—युग अभिमान करे,
होता है ऍसा नहीं जहाँ, वह राष्ट्र नहीं टिक पाता है,
आजादी खण्डित हो जाती, सम्मान सभी बिक जाता है।
यह धर्म—कर्म यह मर्म
सभी को मैं समझाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चरण
उनके यश गाया करता हूँ।


पूजे न शहीद गए तो फिर, यह पंथ कौन अपनाएगा?
तोपों के मुँह से कौन अकड़ अपनी छातियाँ अड़ाएगा?
चूमेगा फन्दे कौन, गोलियाँ कौन वक्ष पर खाएगा?
अपने हाथों अपने मस्तक फिर आगे कौन बढ़ाएगा?


पूजे न शहीद गए तो फिर आजादी कौन बचाएगा?
फिर कौन मौत की छाया में जीवन के रास रचाएगा?
पूजे न शहीद गए तो फिर यह बीज कहाँ से आएगा?
धरती को माँ कह कर, मिट्टी माथे से कौन लगाएगा?
मैं चौराहे—चौराहे पर
ये प्रश्न उठाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चारण
उनके यश गाया करता हूँ।
जो कर्ज ने खाया है, मैं चुकाया करता हूँ।

Sunday, 26 February 2012

U.P. की जनता के जनादेश के थप्पड़ों से अन्ना गैंग का मुंह लाल हुआ...

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में इस बार सर्वाधिक मतदान हुआ है. प्रत्येक जनपद में वोट डालने निकली मतदाताओं की भीड़ ने पिछले सभी रिकार्ड ध्वस्त किये हैं. यह तथ्य उस अन्ना गैंग के मुंह पर यू.पी. की जनता के जनादेश के जोरदार जूते की तरह है जो पिछले ग्यारह महीनों से इस देश के आम आदमी के लोकतान्त्रिक अधिकारों का अपहरण करने की कुटिल कोशिशें करता रहा है. इस देश की लोकतान्त्रिक परम्पराओं पद्धत्तियों के प्रति देश में अविश्वास की आग लगाकर उसे राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक अराजकता का दावानल बनाना चाहता है. इस गैंग का सरगना किशन बाबूराव आज भी अभी भी "राईट टू रिजेक्ट" का फूहड़ गीत अपनी पूरी धूर्तता और दुष्टता के साथ गाता घूम रहा है.
जनता की आँखों में धूल झोंकने निकली इन जनलोकपाली जालसाजों और उसके सरगना किशन बाबूराव को बताना चाहूँगा कि राईट टू रिजेक्ट के लिए उसे किसी नौटंकी की जरूरत नहीं है.जनता जब सबको रिजेक्ट करना चाहेगी तब खुद ही वोट डालने नहीं जायेगी. क्योंकि जनता अपनी इक्षा से वोट डालने निकलती है. इस बार के विधानसभा चुनाव में अब तक हर जनपद में 50% से अधिक मतदान हुआ है. मतलब साफ़ है कि "राईट टू रिजेक्ट" की मांग करते घूम रहे जालसाजों और उनकी मांग को खुद जनता ने ही रिजेक्ट कर दिया है
सिर्फ यही नहीं बल्कि इस गैंग और उसके सरगना के दोगलेपन दोहरे चरित्र को भी पुनः याद करिए ज़रा.
पिछले ग्यारह महीनों के दौरान किशन बाबूराव ने टीवी. कैमरों के सामने दहाड़ते हुए उत्तरप्रदेश सहित 5 राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव में कांग्रेस का विरोध करने, उसे वोट नहीं देने की अपील करने की कसमें कितनी बार और किस-किस तरह खायीं थीं पूरा देश यह जानता है.
मुंबई में अपने जनलोकपाली ड्रामे के सुपरफ्लाप शो के बाद भी उसने ऎसी कसमों को जोरशोर से दोहराया .लेकिन पूरे चुनाव के दौरान उसी तरह गायब हुआ जैसे गधे के सिर से सींग.
इसके लिए बहाना बनाया बीमारी का, ऎसी कौन सी बीमारी थी जिसके कारण यह चार लाइनों की अपील भी अपने मुंह से नहीं कर सका और ना ही लिख सका.???
वैसे इसी दौरान उसकी अन्य सभी प्रकार की बयानबाजी जारी रही लेकिन कांग्रेस के खिलाफ वह एक शब्द नहीं बोला.
औपचारिकता निभाने के लिए, अख़बारों में फोटो छपवाने के लिए इसका गैंग 72 जिलों वालें उत्तरप्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के चुनाव में 1000-500 लोगों के जमावड़े वाली केवल दो दर्जन "मीटिंगें" निपटाकर अपनी पीठ खुद ही थपथपाता घूम रहा है कि, उत्तरप्रदेश में उसके कारण ही बढ़ा हुआ मतदान हुआ है.
कुछ मीडियाई भांडों ने भी इस गैंग के इस बडबोले दावे का ढोल पीटना प्रारम्भ कर दिया है. जबकि सच्चाई इसके ठीक विपरीत है. पिछले ग्यारह महीनों से ये अन्ना गैंग इस देश की लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को ध्वस्त करने का षड्यंत्र रचता रहा है. संसद और विधानसभाओं के खिलाफ ज़हर उगलता रहा है. चुनावों में भाग नहीं लेने को उकसाता रहा है. इसीलिए मेरा मानना है कि इस बार यू.पी. की जनता ने अपने जनादेश के जूतों से अन्ना गैंग का मुंह लाल कर दिया है...!!!

देश अनंतकाल तक आपका ऋणी रहेगा......

भारतीय स्वतंत्रता के महासंग्राम के विलक्षण महानायक की पुण्य तिथि पर उनको शत-शत नमन......

* सावरकर दुनिया के अकेले स्वातंत्र्य योद्धा थे जिन्हें दो-दो आजीवन कारावास की सजा मिली, सजा को पूरा किया और फिर से राष्ट्र जीवन में सक्रिय हो गए।

* वे विश्व के ऐसे पहले लेखक थे जिनकी कृति 1857 का प्रथम स्वतंत्रता को दो-दो देशों ने प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया।

* सावरकर पहले ऐसे भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने सर्वप्रथम विदेशी वस्त्रों की होली जलाई।

* वे पहले स्नातक थे जिनकी स्नातक की उपाधि को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण अँगरेज सरकार ने वापस ले लिया।

* वीर सावरकर पहले ऐसे भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने सर्वप्रथम विदेशी वस्त्रों की होली जलाई।

* वीर सावरकर पहले ऐसे भारतीय विद्यार्थी थे जिन्होंने इंग्लैंड के राजा के प्रति वफादारी की शपथ लेने से मना कर दिया। फलस्वरूप उन्हें वकालत करने से रोक दिया गया।

* वीर सावरकर ने राष्ट्र ध्वज तिरंगे के बीच में धर्म चक्र लगाने का सुझाव सर्वप्रथम ‍दिया था, जिसे राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने माना।

* उन्होंने ही सबसे पहले पूर्ण स्वतंत्रता को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का लक्ष्य घोषित किया। वे ऐसे प्रथम राजनैतिक बंदी थे जिन्हें विदेशी (फ्रांस) भूमि पर बंदी बनाने के कारण हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मामला पहुँचा।

* वे पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का चिंतन किया तथा बंदी जीवन समाप्त होते ही जिन्होंने अस्पृश्यता आदि कुरीतियों के विरुद्ध आंदोलन शुरू किया।

* दुनिया के वे ऐसे पहले कवि थे जिन्होंने अंदमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएँ लिखीं और फिर उन्हें याद किया। इस प्रकार याद की हुई दस हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुन: लिखा।