Monday, 26 November 2012

समर शेष है जनगंगा को खुलकर लहराने...!!!

राष्ट्रकवि दिनकर ने स्वतन्त्रता के मात्र सात वर्ष पश्चात् ही इन पंक्तियों में देश की दशा और दिशा की व्यथा का सूक्ष्म साक्षात्कार किया था, और प्रचंड निर्भीकता के साथ दिल्ली को दर्पण दिखाया था।
इस पोस्ट में जहां पैंसठ लिखा गया है, स्वर्गीय दिनकर जी ने वहाँ सात लिखा था।

Friday, 23 November 2012

ये पिछले 3 सालों से चुप्पी क्यों साधे था...???


ये है वो आर पी सिंह जो डीजी (पोस्ट ऐंड टेलिकम्युनिकेशन्स) के पद से सितंबर 2011 में रिटायर हुआ था, ये पिछले 3 सालों से चुप्पी साधे था लेकिन कल इसको अचानक दौरा पडा और अब इसका कहना है कि, कोई 2G घोटाला नहीं हुआ था क्योंकि सरकार को केवल लगभग 2100 करोड़ का ही नुक्सान हुआ था, 1.76 लाख करोड़ के नुक्सान की बात केवल गप्प है ऐसा कोई नुक्सान नहीं हुआ। इसके बयान के तुरंत बाद सोनिया गांधी का उछलता कूदता बयान आ गया कि, अब सच सामने आ गया है और भाजपा बेनकाब हो गयी है।
हालांकि आर पी सिंह के इस बयान के बाद उसको तत्काल या तो पागलखाने भेज दिया जाए या फिर जेलखाने भेजा जाए, क्योंकि जिस घोटाले की जांच खुद सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में करवाई और दूर संचार मंत्री ए।राजा समेत दर्जनों कार्पोरेट दिग्गजों को महीनों तक जेल में बंद रखा था तब ये आर पी सिंह चुप क्यों था? अतः या तो ये पागल है या फिर इस देश, इस देश की सुप्रीम कोर्ट और महीनों तक जेल में रहे दर्जनों दिग्गजों से सच और साक्ष्य छुपाने का घोर अपराधी है ये। और रही बात सोनिया की तो उसने तो अपने बयान से भाजपा के बजाय सीधे सुप्रीम कोर्ट पर ही हमला बोला है। ताज्जुब देखिये कि, सोनिया को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर शर्म कभी नहीं आई लेकिन इसके बयान पर वो फूली नहीं समायी.

कांग्रेसी नेताओं की औलादों,दामादों और सालों को बचाने के लिए दर्ज़नों आतंकवादी क्यों छोड़े गए थे...???

पहले बीती 21 नवम्बर को कपिल सिब्बल और कांग्रेसी प्रवक्ता संजय निरूपम ने फिर 22 नवम्बर को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने कंधार कांड में छोड़े गए आतंकियों को लेकर भाजपा पर तीखा आक्रमण किया है। अतः सिब्बल दिग्विजय और निरूपम को केवल पांच प्रकरण याद दिलाना चाहूँगा
पहला है वो ''तसद्दुक देव'' जो वर्तमान केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद का ''साला'' है और जिसका 1991 में ही अपहरण किया गया था

और उसे छुड़ाने के लिए तीन दुर्दांत आतंकवादियों को केंद्र की तत्कालीन केंद्र सरकार ने छोड़ दिया था।
दूसरा है वो ''नाहिदा सोज़'' जो वर्तमान केन्द्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज़ की सुपुत्री है और जिसका अपहरण 1991 में ही किया किया गया और उसे छुड़ाने के लिए 5 दुर्दांत आतंकवादियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था
तीसरा है वो ''मुस्तफा असलम'' जो जम्मू-काश्मीर प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष गुलाम रसूल कार का दामाद था और जिसका 1992 में अपहरण किया गया था और जिसको छुड़ाने के किये 3 दुर्दांत आतंकियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था।
चौथा है वो नसरुल्लाह जो पूर्व मंत्री जी एम् मीर लासजन का सुपुत्र था जिसका 1992 में अपहरण कर लिया गया था और जिसे छुड़ाने के लिए 7 दुर्दांत आतंकवादियों को बिना शर्त छोड़ दिया गया था।
पांचवां है, एक सप्ताह तक हज़रत बल में दावत-ए-बिरयानी देने के बाद दर्जनों पाकिस्तानी आतंकियों को वापस पकिस्तान भाग जाने का सेफ पैसेज देने के लिए सेना को मजबूर करने वाली केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार का वह कुकर्म जिसे देश आज भी नहीं भूला है। उल्लेखनीय है कि, ये फैसले लेने वाली कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार के वित्त मंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री शरद पवार और विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ही थे, गुलाम नबी आज़ाद भी संसदीय कार्य/उड्डयन मंत्री थे।
अतः कांधार में 166 निरीह-निर्दोष-निरपराध विमान यात्रियों के बदले 3 आतंकियों को छोड़ने पर आगबबूला होने का ढोंग पाखंड करने वाली कांग्रेस से देश जानना चाहता है कि, कांग्रेसी नेताओं की औलादों,दामादों और सालों को बचाने के लिए दर्ज़नों आतंकवादी क्यों छोड़े गए थे...???

Wednesday, 21 November 2012

इन दुष्टों को भी देश क्या सज़ा दे...???


इस फोटो में महेश भट्ट, दिग्विजय सिंह के साथ कांग्रेस का राज्य सभा सदस्य मदनी(पगड़ी में) और उसके बगल में महाराष्ट्र सरकार का गृहराज्य मंत्री तथा मुंबई कांग्रेस का अध्यक्ष रहा कृपाशंकर सिंह मौजूद है।
ये मौका है इसी फोटो में मौजूद काले कपड़ों और झबरैले बालों वाले अज़ीज़ बर्नी की उस पुस्तक के 29 दिसंबर 2010 को हुए विमोचन का, जिसका नाम ही उसने रखा था... ''आरएसएस का षड्यंत्र, 26/11''
इसकी इस पुस्तक को 'गीता' की तरह सच मानकर दिग्विजय सिंह इसके आरोपों को आवाज़ और हवा देता रहा है। महेश भट्ट भी ऎसी ही करतूतों को अंजाम देता रहा है।
ये बर्नी 26/11 हमले के लिये पाकिस्तान को क्लीन चिट देने के लिए इस हद तक नीचता पर उतर चुका है कि, इसने नरेंद्र मोदी तक पर 26/11 के हमले की साज़िश का आरोप लगाया था और हेमंत करकरे का हत्यारा भारतीय सेना को सिद्ध करने की कोशिश की थी।
अतः आज जब कसाब फांसी पर लटकाया जा चुका है तब इन दुष्टों को भी देश क्या सज़ा दे ?
तथ्यों की पुष्टि के लिए देखिये ये लिंक
http://www.haindavakeralam.com/hkpage.aspx?PageID=13215&SKIN=C
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